अप्रैल का महीना आते ही देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और ऐसे में घरों में ठंडक बनाए रखने के लिए कूलर एक बेसिक ज़रूरत और किफायती विकल्प बन जाता है। भारत में एयर कंडीशनर के मुकाबले कूलर ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि ये कम खर्च में अच्छी ठंडक […]
अप्रैल का महीना आते ही देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और ऐसे में घरों में ठंडक बनाए रखने के लिए कूलर एक बेसिक ज़रूरत और किफायती विकल्प बन जाता है। भारत में एयर कंडीशनर के मुकाबले कूलर ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि ये कम खर्च में अच्छी ठंडक देते हैं। बाजार में मुख्य रूप से दो तरह के कूलर मिलते हैं, जिनमें से एक मेटल (आयरन) बॉडी और दूसरा प्लास्टिक बॉडी के साथ आता है। दोनों के अपने अलग फायदे और सीमाएं हैं, इसलिए खरीदने से पहले इनके बीच का अंतर समझना जरूरी है। Survey Thank you for completing the survey! लोहे के कूलर के फायदे और नुकसान लोहे की बॉडी वाले कूलर भारत में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे हैं और अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं। इनकी बनावट ठोस होती है, जिससे ये लंबे समय तक टिके रहते हैं। आमतौर पर इनमें बड़े पंखे और ज्यादा पानी रखने की क्षमता होती है, जो बेहतर कूलिंग में मदद करती है। हालांकि, इनका वजन ज्यादा होने की वजह से इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, अगर सही देखभाल न की जाए तो इनमें जंग लगने की समस्या भी आ सकती है। प्लास्टिक के कूलर के फायदे और नुकसान दूसरी ओर, प्लास्टिक कूलर आजकल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। ये वजन में हल्के होते हैं और आसानी से कहीं भी शिफ्ट किए जा सकते हैं। इनका लुक भी ज्यादा मॉडर्न और आकर्षक होता है, जिससे ये घर के इंटीरियर में बेहतर लगते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें जंग लगने का खतरा नहीं होता। लेकिन, लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद इनकी बॉडी कमजोर पड़ सकती है या टूटने की आशंका रहती है। कौन सा कूलर बेहतर? जहां तक कूलिंग की बात है, यह कूलर के मटीरियल पर निर्भर नहीं करती। असली फर्क उसके फैन, मोटर की क्षमता और इस्तेमाल किए गए कूलिंग पैड पर पड़ता है। अगर किसी कूलर में अच्छी क्वालिटी के हनीकॉम्ब पैड और ताकतवर मोटर लगी हो, तो वह बेहतर ठंडी हवा देता है, चाहे उसकी बॉडी मेटल की हो या प्लास्टिक की। आमतौर पर बड़े साइज वाले लोहे के कूलर बड़े कमरों या खुले क्षेत्रों में ज्यादा असरदार साबित होते हैं। बिजली की खपत भी दोनों में अलग-अलग हो सकती है। लोहे के कूलर अक्सर बड़ी और ज्यादा पावरफुल मोटर के साथ आते हैं, इसलिए इनमें बिजली की खपत ज्यादा होती है। वहीं, प्लास्टिक कूलर में आमतौर पर कम क्षमता वाली मोटर होती है, जिससे बिजली की बचत होती है। मेंटेनेंस की बात करें तो प्लास्टिक कूलर ज्यादा आसान रहते हैं, क्योंकि इनमें जंग या पेंट खराब होने जैसी समस्याएं नहीं होतीं। इसकी तुलना में मेटल कूलर को समय-समय पर साफ करना और जरूरत पड़ने पर पेंट करवाना पड़ सकता है। किसे खरीदना चाहिए? अगर आपका कमरा बड़ा है या आप खुले एरिया के लिए कूलर लेना चाहते हैं और वजन कोई समस्या नहीं है, इसलिए मेटल कूलर बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप हल्का, पोर्टेबल और कम देखभाल वाला कूलर चाहते हैं, तो प्लास्टिक कूलर आपके लिए ज्यादा सही रहेगा। कुल मिलाकर, सही कूलर का चुनाव आपकी जरूरत, बजट और इस्तेमाल की जगह पर निर्भर करता है। यह भी पढ़ें: गर्दा उड़ाने वाला कैमरा और 6600mAh की बैटरी..इस दिन लॉन्च हो रहा Vivo का कड़क फोन
